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Thursday, 15 January 2015

पहली ही मुलाकात में परवाना मर गया.....

                     (1)
उसको जुनूँन है मेरी हस्ती मिटा दे,इसलिये
हर वक्त अपनें चाकुओं को धार देता है
एक तरफ मेरी अना, एक तरफ उसका गुरूर
अब देखते हैं कौन बाजी मार लेता है।
                     (2)
एक शख्स दग़ा कर रहा है हर किसी के साथ
नज़रों से ज़मानें की मुकम्मल उतर गया
इज़हारे मुहब्बत का ज़ुनूँ गौर से देखो
पहली ही मुलाकात में परवाना मर गया।
                     (3)
साहिल के सुकूँ से मेरा दिल ऊब गया है
मौज़ों से उलझनें का मज़ा ले रहा हूँ मै
जिस-जिस की तमन्ना हो आ जाये मेरे साथ
दुनियाँ के हौसलों को सदा दे रहा हूँ मै।
                     (4)
कोई सपना बनाता हूँ वो सपना टूट जाता है
कोई भी काम करता हूँ, मुकद्दर रूठ जाता है
किसी का घर जलानें वालों थोड़ा होश में आओ
एक घर बनानें में पसीना छूट जाता है।
               ....राजेश कुमार राय।.....