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Wednesday, 30 December 2015

कभी न बुझ सके जो, वो शम्मा जलायेंगे..........

नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे
नेक काम करके गुलशन को सजायेंगे
तूफान चाहे जितनी ताकत लगा ले अपनी
कभी न बुझ सके जो वो शम्मा जलायेंगे
नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे।

गुमनाम ज़िंदगी से सड़कों पे निकलकर
फूलों से काँटों के रिश्ते को समझकर
मुश्किल हो चाहे जितनीं इस राहे-ज़िंदगी में
मंज़िल के पास जा कर दुनियाँ को दिखायेंगे
नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे।

सच्चाईयों के राह पे चलते ही रहेंगे
साहिल सा समंदर से लड़ते ही रहेंगे
आओ मेरे पास भटकते हुये लोगों
नये वर्ष को हम सब मिल के मनायेंगे
नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे।

ईमाँन से रहोगे तरक्की भी रहेगी
दोस्तों में प्यार की गंगा ही बहेगी
सूरज की रौशनी में सितारे भी दिखेंगे
चैन की बंशी हम दुनियाँ को सुनायेंगे
नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे।

कभी न बुझ सके जो, वो शम्मा जलायेंगे
नये साल में हम तक्द़ीर बनायेंगे।

-----------राजेश कुमार राय।------------