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Thursday, 19 May 2016

रंग ला रहा है चराग़ों का फैसला............

                    (1)
किसी को दर्द क्या देना !  किसी से दुश्मनी कैसी !
ये तेरा ज़िस्म फ़ानी है किसी दिन रूठ जायेगा।

                   (2)
बुजुर्गों के लिये थोड़ी मुहब्बत द़िल मे रख लेना
मुसलसल उम्र ढ़लती है शज़र गिर जायेगा एक दिन।

                   (3)
बड़ी देर तक खड़ा था आईने के रूबरू
लगता था मेरे अक्स मे कोई और आ गया।

                   (4)
रंग ला रहा है चराग़ों का फैसला
इतना जले कि जल के हवा ही बिखर गयी।

                   (5)
जिंदा बचा हुआ है सौ वार झेलकर
जाँबाज ने शमशीर की औकात बता दी।

                   (6)
सारे ग़म डूबो देना हौसलों की चाहत से
ज़िंदगी की वादी में, तब बहार आयेगी।

      --------राजेश कुमार राय।--------